KAUSHAL PANDEY (Astrologer)

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विजय दशमी के दिन करे शमी और अपराजिता पूजन :- कौशल पाण्डेय

Posted On: 24 Oct, 2012 में

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aprajita
आश्विन शुक्ल दशमी को विजय दशमी कहा जाता है, विजय के संदर्भमें दशहरा के दिन शास्त्र में बताया गया है की विजय प्राप्ति के लिए शस्त्र (हथियार) की पूजा अवश्य करे , आज के दिन नवीन हंथियार खरीद कर घर की दक्षिण दिशा में टांगना चाहिए साथ ही समी और अपराजिता वृक्ष की पूजा करे और दोनों की जड़ दाहिने हाँथ में बांधने से समाज में यश और कीर्ति बढती है , क्योंकी दशहरा के दिन ही नौ दिनों तक माँ दुर्गा की पूजा-आराधना करने के बाद भगवान श्री राम ने अभिमानी रावण का वध कर के इस संसार को असत्य पर सत्य की जीत का सन्देश दिया था .
शमीपूजन: निम्न श्लोकोंसे शमीकी प्रार्थना करते हैं ।
शमी शमयते पापं शमी लोहितकण्टका ।धारिण्यर्जुनबाणानां रामस्य प्रियवादिनी ।।
करिष्यमाणयात्रायां यथाकाल सुखं मया ।तत्रनिर्विघ्नकर्त्रीत्वंभवश्रीरामपूजिते।।
श्लोक के उच्चारण के साथ ही मानसिक रूप से यह प्रार्थना करनी चाहिए कि ‘शमी सभी पापों को नष्ट करती है। शमी शत्रुओं का समूल विनाश करती है। शमी के कांटे हत्या इत्यादि के पापों से भी रक्षा करते हैं। अर्जुन के धनुष को धारण करने वाली और भगवान श्रीराम को भी प्रिय लगने वाली शमी मेरा कल्याण करे।’

अपराजिता पूजन मंत्र :-
हारेण तु विचित्रेण भास्वत्कनकमेखला ।अपराजिता भद्ररता करोतु विजयं मम ।।

पूजा के समय वृक्षके नीचे चावल, सुपारी हल्दी की गांठ और मुद्रा रखते हैं । फिर वृक्षकी प्रदक्षिणा कर उसके मूल (जड़) के पासकी थोड़ी मिट्टी व उस वृक्षके पत्ते घर लाते हैं । ऐसा जो आज की दिन करता है यह साल भर शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है ..अपराजिता देवी सकल सिद्धियों की प्रदात्री साक्षात माता दुर्गा का ही अवतार हैं।
यात्रा प्रारंभ करने के समय माता अपराजिता की यह स्तुति अनिवार्य रूप से करनी चाहिए, जिससे यात्रा में कोई विघ्न उपस्थित नहीं होता-
शृणुध्वं मुनय: सर्वे सर्वकामार्थसिद्धिदाम्। असिद्धसाधिनीं देवीं वैष्णवीमपराजिताम्।। नीलोत्पलदलश्यामां भुजङ्गाभरणोज्ज्वलाम्।
बालेन्दुमौलिसदृशीं नयनत्रितयान्विताम्।। पीनोत्तुङ्गस्तनीं साध्वीं बद्धपद्मासनां शिवाम्। अजितां चिन्तयेद्देवीं वैष्णवीमपराजिताम्।।

सनातन धर्म के अनुसार मंत्र सिद्धि के लिए आवश्यक है कि मंत्र को गुप्त रखना चाहिए। मंत्र- साधक के बारे में यह बात किसी को पता नहीं चलना चाहिए कि वो किस मंत्र का जप करता है या कर रहा है। यदि मंत्र के समय कोई पास में है तो मानसिक जप करना चाहिए।
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे :- पंडित कौशल पाण्डेय 09968550003

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