KAUSHAL PANDEY (Astrologer)

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दीपावली विशेषांक 2012

Posted On: 6 Nov, 2012 में

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Deepawali_matter :- पंडित कौशल पाण्डेय
13.11.2012 मंगलवार को दीपावली है.कार्तिक महीने में पड़नेवाली अमावस्या को दीपावली के रूप में बडी धूम-धाम से मनाया जाता हैं।
सबसे पहले आप सभी देशवाशियों को अंधकार पर प्रकाश के इस त्यौहार पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनायें ,
क्योंकि आज के दिन ही प्रभु श्री राम रात्रि में अयोध्या वापिस आये थे ,इसलिए अयोध्यावासियों ने पूरे शहर को दीपकों से जगमगा दिया था। दीवाली से दो बातों का गहरा संबंध है- एक तो लक्ष्मी पूजन और दूसरा राम का लंका विजय के बाद अयोध्या लौटना। प्रभु श्री राम के आगमन और माता सीता रुपी लक्ष्मी के आगमन के उपलक्ष्य में इस दिन पुरे देश में दीपक जलाकर और खुशिया मनाकर यह त्यौहार बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है ..

कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को सूर्य का तुला राशि में प्रवेश होता है। तुला राशि का स्वामी शुक्र सभी मनोकामनाएं पूरी करने वाला ग्रह है। यह कालपुरुष की कुंडली में धन व सप्तम भाव का स्वामी भी है अतः जब तुला राशि में सूर्य और चंद्र का मिलन होता है तब नैसर्गिक कुंडली के अनुसार चतुर्थेश (चंद्र) व पंचमेश (सूर्य) का मिलन होने से लक्ष्मी योग का उदय होता है। यह योग कार्तिक अमावस्या (दीपावली) को पड़ता है। इसलिए यह दिन अति धनदायक माना जाता है।

इस दिन जब सिंह का आरंभ होता है तब तृतीय स्थान में सूर्य और चंद्र की युति होती है। इस युति के समय साधना उपासना करने से साधक के पराक्रम में वृद्धि होती है, उसके मार्ग में आने वाली बाधाओं का निवारण होता है और सूर्य के अपनी उच्च राशि को देखने से भाग्यवृद्धि होती है। इस दृष्टि से सिंह लग्न की महत्ता अपरंपार है।

आधी रात में पड़ने के कारण इसकी विशेषता और बढ़ जाती है क्योंकि अर्धरात्रि में ही लक्ष्मी का आगमन भी माना जाता है।
‘‘अर्धरात्रे भवेव्येय लक्ष्मी राश््रयितुं गृहान्’’ अर्धरात्रि में लक्ष्मीपूजन को ब्रह्मपुराण में भी श्रेष्ठ कहा गया है।

सिंह लग्न के अतिरिक्त वृष लग्न को भी अच्छा माना जाता है। विभिन्न लग्नों और मुहूर्तों के शुभाशुभ परिणाम मेष लग्न इस लग्न में किए गए अनुष्ठानों से धन-धान्य में वृद्धि होती है।
वृष लग्न इस लग्न में किया जाने वाला कार्य असफल व घातक होता है।
मिथुन लग्न यह लग्न संतान हेतु घातक होता है।
कर्क लग्न शुभ, सफल व सर्वसिद्धिप्रदायक होता है।
सिंह लग्न: बुद्धि हेतु हानिकारक होता है।
कन्या लग्न तंत्र साधना हेतु श्रेष्ठ माना गया है।
तुला लग्न इसमें किया जाने वाला अनुष्ठान सर्वसिद्धि प्रदाता माना जाता है।
वृश्चिक लग्न यह एक श्रेष्ठ व लग्न है और इसमें अनुष्ठान करने से स्वर्ण आदि द्रव्यों की प्राप्ति होती है।
धनु लग्न यह एक अशुभ लग्न है, कई लोग देव गुरु बृहस्पति की राशी होने से इस राशी को शुभ भी मानते है
मकर लग्न शुभ व पुण्यदाता लग्न है।
कुंभ लग्न इस लग्न में साधना करने से श्रेष्ठ फल की प्राप्ति होती है।
मीन लग्न यह एक अशुभ लग्न है, कई लोग देव गुरु बृहस्पति की राशी होने से इस राशी को शुभ भी मानते है .
विशेष ध्यातव्य है कि महानिशा की रात्रि अति शुभ मानी गई है,
अतः इस रात्रि को किसी भी लग्न में की गई साधना का कोई दुष्परिणाम नहीं होता।

दीपावली पूजन मुहूर्त :-

13 नवम्बर 2012, मंगलवार के दिन प्रातः 7:13 तक चतुर्दशी रहेगी इसके बाद अमावश्या तिथि है ,दिल्ली तथा आसपास के इलाकों में सूर्यास्त 17:26 पर होगा. इस अवधि से लेकर 02 घण्टे 24 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा. प्रदोष काल के समय को दिपावली पूजन के लिये शुभ मुहूर्त के रुप में प्रयोग किया जाता है. मंगल के दिन स्वाति नक्षत्र सायं 5:6 तक है इसके बाद विशाखा नक्षत्र आ रहा है जो रात्रि 11 बजकर 57 मिनट तक रहेगा.

व्यापारी वर्ग के लिए धनु लग्न श्रेष्ठ है मंगल के दिन धनु लग्न 09:13 से 11:17 के मध्य है
दीपावली के दिन मकर लग्न सबसे अच्छा शुभ फलदेने वाला है यह प्रातः 11:17 से लेकर दोपहर 13:01 तक रहेगा
कुम्भ लग्न दोपहर 13:01 से 14:30 तक है
दीपावली को रात्रि में 7:31 से 9:45 तक मिथुन लग्न है
इस समय शनि महाराज शुभ फल को देने वाले है साथ ही मकर और कुम्भ राशी के स्वामी भी है .
09:22 से चर लाभ अमृत के तीन चौघडिया मुहूर्त 13 बजकर 44 मिनट तक शुभफल दायक रहेगे
दीपक जलाने के लिए सायं 14:30 से 17:34 के मध्य का समय अति उत्तम है ,
तंत्र मंत्र और यन्त्र का पूजन करने के लिए महानिशा की रात्रि 11:40 से 12:34 का समय शुभ+अमृत देने वाली है ,
क्योंकि अर्द्ध रात्रि को ही समुद्र से माता लक्ष्मी का आगमन हुआ था इसलिए रात्रि काल में माता लक्ष्मी की पूजा विशेष फल दाई होती है .

दीपावली पूजन सामग्री :-
दीपावली पूजा में माता लक्ष्मी को लाल फल ,लाल पुष्प लाल वस्त्र विशेष रूप से अर्पित करे .आज के दिन जुड़वाँ छुहारा , 1 मुखी नारियल . या जुड़वाँ केला , लाल कमल से पूजा करने का अधिक महत्व है ,स्फटिक, सोना, चांदी या ताम्र पर बना श्रीयंत्र, कुबेर यंत्र, दक्षिणावर्ती शंख, लघु नारियल, गोमती चक्र, 11 कौड़ियां और हल्दी की गांठ की प्राण प्रतिष्ठा करके
रखें साथ ही पंचामृत (गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर ), रोली, कलावा, सिंदूर, १ नारियल, (चावल) अक्षत, लाल वस्त्र , लाल फूल , 5 सुपारी, लौंग, पान के पत्ते, घी, कलश, कलश हेतु आम या अशोक के पत्ते , चौकी, समिधा, हवन कुण्ड, हवन सामग्री, कमल गट्टे, फल, बताशे, मिठाईयां, पूजा में बैठने हेतु आसन, हल्दी , अगरबत्ती, कुमकुम, इत्र, दीपक, रूई, आरती की थाली. कुशा, रक्त चंदनद, श्रीखंड चंदन. 1 चांदी का सिक्का .

माता लक्ष्मी का एक नाम चंचला है, एक घर में टिक कर नहीं बैठती। आज जो करोड़पति है एक झोंके में दिवालिया बन जाता है, निर्धन लक्ष्मीवान बन जाता है। यह सब लक्ष्मी की चंचल प्रवृत्ति के कारण ही है। जीवन में लक्ष्मी की अनिवार्यता है, धनी होना मानव जीवन की महान उपलब्धि है, गरीबी और निर्धनता जीवन का अभिशाप मानी जाती है। प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि वह संपन्न बने, इसके लिए वह हमेशा प्रयत्नशील रहता है।

यहां कुछ सरल प्रयोग दिए जा रहे हैं, जिन्हें जीवन में अपनाएं तो लक्ष्मी को आपके द्वार आना ही पड़ेगा। करे माँ लक्ष्मी का स्वागत इस प्रकार और लाये खुशियों की सौगात :-

1:-सर्वप्रथम घर के पूर्व दिशा में श्री यंत्र स्थापित करे > जिसकी साधना करने से महालक्ष्मी के पूर्ण स्वरूप के साथ-साथ जीवन में उन्नति का पथ दृष्टिगोचर होता है।
2:-अपने पति हरि विष्णु के बिना लक्ष्मी किसी के भी घर स्थायी निवास नहीं करती। विष्णु जहां उपस्थित हैं, लक्ष्मी वहां स्थायी निवास करती है। जहां शालिग्राम हो, अनंत महायंत्र हो, शंख हो। शंख, शालिग्राम एवं तुलसी मिलाकर लक्ष्मीनारायण की उपस्थिति का वातावरण बनता है ।
3:- लक्ष्मी को समुद की पुत्री माना गया है। समुद्र से प्राप्त विविध रत्न उसके सहोदर हैं। इनमें प्रमुख हैं दक्षिणावर्ती शंख, मोती शंख, गोमती चक्र आदि। उनकी घर में उपस्थिति लक्ष्मी देवी को आपके घर,स्थापित होने के लिए विवश कर देती है।
4:- लक्ष्मी का नाम कमला है। लक्ष्मी को कमल सर्वाधिक प्रिय है। लक्ष्मी की साधना करते समय कमल पुष्प अर्पित करने पर, कमल गट्टे की माला से लक्ष्मी मंत्र के जप करने पर लक्ष्मी शीघ्र प्रसन्न होती है। ‘श्री सूक्त’ के पद का पाठ करते हुए कमल गट्टे के एक बीज और शुद्ध घी की हवन में आहुति देना फलदायक होता है।
5:- श्री गणपति की स्थापना होने पर लक्ष्मी की पूर्ण स्थापना होती है। बिना गणपति के लक्ष्मी साधना अधूरी रहती है।
6:- महालक्ष्मी की साधना अवश्य करनी चाहिए।
इस मंत्र से करे माता लक्ष्मी का जाप कमल गट्टे की माला से।
‘‘ॐ श्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद मम गृहे आगच्छ आगच्छ महालक्ष्म्यै नमः’’
‘‘ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः।’
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्ली श्रीमहालक्ष्म्यै नमः
7:-इसके अतिरिक्त हत्थाजोड़ी, बिल्ली की जेर और सिंयार सिंगी इन तीनों तांत्रिक वस्तुओं को चांदी की एक डिब्बी में रखकर उसे सिंदूर से पूरा भर दें। फिर उसे घर या पूजा कक्ष में रख दें और नित्य प्रातः काल स्नानादि कर उस डिब्बी को धूप, दीप, अगरबत्ती दिखाएं। ऐसा करने से घर या व्यापारिक प्रतिष्ठान में किया गया हर तांत्रिक प्रयोग सदा के लिए दूर हो जाएगा और स्थिर लक्ष्मी का वास होगा।
पूजा के अंत में श्री सूक्त एवं लक्ष्मी सूक्त का पाठ करना श्रेष्ठ माना गया है। इसका पाठ निष्ठा और विश्वास के साथ करने से मां लक्ष्मी की कृपा वर्ष भर परिवार के सभी सदस्यों पर बनी रहती है तथा लक्ष्मी जी का घर में स्थायी निवास रहता है।
अधिक जानकारी के लिए मिले या संपर्क करे :- कौशल पाण्डेय 09968550003

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